तीन ताल की टीम को सादर प्रणाम मैं तब के फैजाबाद और अब के अयोध्या से फैजाबादी गवार इंस्टा की 1 मिनट की रील से 3-4 घंटे का पॉडकास्ट कब जिंदगी का हिस्सा बन गया याद करके बताऊंगा कभी. फिलहाल एक बात जो अक्सर मन में आती है साझा करना चाहूंगा। जिंदगी के 35 बसंत देख लिए जिनमें से शुरुआती 22 साल फैजाबाद शहर में ही बताएं। फैजाबाद को अयोध्या बनते अपने आंखों के सामने देखा। परिवर्तन और आधुनिकरण के नाम पर अपने छोटे से शहर को पिछले कुछ वर्षों में बदलते देखा। शायद यह बदलाव बेहतरी के लिए था लेकिन जब मेरा शहर उजाड़ कर फिर से बसाया जा रहा था तुम मुझे कुछ ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मेरा पुराना कच्चा मकान जिसके आंगन में हमने बैट बॉल खेला वह हमसे दूर जा रहा हो। पिछले 15 वर्षों से पहले पढ़ाई और फिर नौकरी की वजह से वापस अपने शहर में जाना साल में एक या दो बार ही हो पता है लेकिन वहां जाकर मन भारी रहता है। आपकी राय
तीन ताल की टीम को सादर प्रणाम
मैं तब के फैजाबाद और आपके अयोध्या से फैजाबादी गवार
इंस्टा की 1 मिनट की रील से 3-4 घंटे का पॉडकास्ट कब जिंदगी का हिस्सा बन गया याद करके बताऊंगा कभी.
फिलहाल एक बात जो अक्सर मन में आती है साझा करना चाहूंगा।
जिंदगी के 35 बसंत देख लिए जिनमें से शुरुआती 22 साल फैजाबाद शहर में ही बताएं।
फैजाबाद को अयोध्या बनते अपने आंखों के सामने देखा।
परिवर्तन और आधुनिकरण के नाम पर अपने छोटे से शहर को पिछले कुछ वर्षों में बदलते देखा।
शायद यह बदलाव बेहतरी के लिए था लेकिन जब मेरा शहर उजाड़ कर फिर से बसाया जा रहा था तुम मुझे कुछ ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मेरा पुराना कच्चा मकान जिसके आंगन में हमने बैट बॉल खेल वह हमसे दूर चला गया।
पिछले 15 वर्षों से पहले पढ़ाई और फिर नौकरी की वजह से वापस अपने शहर में जाना साल में एक या दो बार ही हो पता है लेकिन वहां जाकर मन भारी रहता है।
आपकी राय