भारतीय चिंतक विनोबा भावे का मानना था कि "स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं कि तुम जो चाहो वह कर सको, बल्कि यह है कि तुम्हें जो करना चाहिए उसे करने की शक्ति हो।" यदि कोई व्यक्ति अपने क्रोध, लालच, भय या बुरी आदतों पर नियंत्रण नहीं रख सकता, तो वह वास्तव में स्वतंत्र नहीं है। आज मोबाइल का एक नोटिफिकेशन भी हमारा ध्यान भटका देता है। ऐसे में प्रश्न उठता है—मालिक कौन है, हम या हमारी आदतें? विनोबा भावे कहते हैं कि मनुष्य को बाँधने वाली जंजीरें केवल लोहे की नहीं होतीं, बल्कि इच्छाओं, डर और लालच की भी होती हैं। जो व्यक्ति स्वयं पर शासन करना सीख लेता है, उसे किसी और पर शासन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। भारतीय चिंतन के अनुसार सच्ची स्वतंत्रता बाहर नहीं, बल्कि भीतर से शुरू होती है। आत्मसंयम, अनुशासन और विवेक ही वास्तविक आज़ादी का आधार हैं।