लीजिए जी ,यही और बाकी रह गया था | श्रीमती अंजना ओम कश्यप जी द्वारा 2 कराेड़ रुपयों का मानहानी कैसे, भई वाह|
सबकी को आदर पूर्वक नमस्कार|
आदर्शवादी तीन ताल की तिकड़ी,अति महत्वपूर्ण स्तंभ पत्रकारिता के प्रतिनिधि और अपने दफ़्तर में किए जाने वाले अमानवीय कार्यों पर नेत्र बंद रखने वाले ताऊ, खान चा और सरदार को नमस्कार|
हम नागरिक यह बात से अवगत है के सरकार अपने कई कृत्यों को छुपाने या खबरों में ना आने के लिए न्यूज मीडिया पर शायद कई प्रतिबंध लगाती और जिसके एवज में पूर्ण सहयोग और कागज़ी प्रेम एवं अनेकों माध्यमों से उनका सर्वोत्तम ध्यान रखता जाता है |पर बात यहां शिक्षा की है| आप तो अपने ए•सी दफ्तरों में बैठ कर मुख विराम कर के बैठे है, पर बच्चों का क्या? खान सर जैसे अध्यापक का क्या? ज़िम्मेदारी हम सबकी है न देश को बेहतर बनाने में, और खान सर तो निष्पक्षता से पढ़ा रहे थे, तो यह दो कौड़ी का बोलना सही था??