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सच ये है बेकार हमें ग़म होता है जो चाहा था दुनिया में कम होता है ढलता सूरज फैला जंगल रस्ता गुम हमसे पूछो कैसा आलम होता है ग़ैरों को कब फ़ुरसत है दुख देने की जब होता है कोई हमदम होता है ज़ख़्म तो हमने इन आँखों से देखे हैं लोगों से सुनते हैं मरहम होता है ज़हन की शाख़ों पर अशआर आ जाते हैं जब तेरी यादों का मौसम होता है
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मेरा नाम alone warrior है वैसे तो मै कानपुरिया हूं, पर रोटी के तलाश करते हुए अब लखनवीं बाशिंदा हूं, उम्र 35 वर्ष, अविवाहित व कुछ वर्षो से सदैव के लिए अखंड ब्रम्हचारी. कुछ समय पूर्व, मैं अपनों से या शायद खुद से बहुत निराश था. तब पता नहीं कैसे पर किसी जागती रात आँखो में खान चा की निर्विकार बच्चों सी तस्वीर वा मुस्कराहट मोबाइल स्क्रीन पे आ दिखी, वो शायद अपनी बेटी ,अपने संघर्ष और अपने परवारिक चुनौतियों की बात कर रहे थे, फिर ताऊ का वो सूर्णिम सूत्र " भला करो , दुनिया याद नहीं रखेगी" , जो की अब मेरा मूल मंत्र बन चुका है, मैंने उनकी कुछ लाइन सुन कर, कई घंटो तक ये सोचा कोई व्यक्ति इतना वैरागी और नो- कम्प्लेनिंग कैसे हो सकता है! मै इस पत्र को लिख रहा हूँ तो दीपावली के दो दिन पहले की शाम है , अकेला अपने रूम में बैठा हुआ था, बाहर से दो दिन पहले से ही पठाखो की आवाज आ रही हैं, जैसा हम बचपन में करत …read more
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    Tauismतड़पाए तरसाए रे नानी याद दिलाए रे दिल्ली की सर्दी… सुनिए दिल्ली की सर्दी पर ताऊ का ताऊइज़्म.
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    Chakmak Chachaदिवाली के मौके पर सुनिए चकमक चाचा और नन्हें की सुरसुराती बतोलेबाजी...
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    Tauismदिवाली की सफाई में ‘Old is gold’ के नाम पर कबाड़ इकट्ठा करने वालों पर सुनिए ताऊ का ताऊइज़्म.
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    Chakmak Chachaमुंबई में एक्टर पर हमले की निंदा करने में चकमक चचा किसका नाम लेने से बच रहे हैं?
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    TauismFear of falling behind पर सुनिए तीन ताल वाले ताऊ का ताऊईज़्म...
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    Chakmak Chachaइंसान अंदर के रावण को जला दे तो बाहर की दुनिए भला चल पाएगी? सुनिए दशहरे पर चकमक और नन्हें की चुटकी.
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    Tauismअंधेरे से डर लगता है? सुनिए अंधकार से उजाले तक के सफर पर तीन ताल वाले ताऊ का ताऊइज़म.
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    Chakmak Chachaप्रोटेस्ट करो तो ऐसे करो कि पुलिस मुद्दा गरमा दे, बस ध्यान ये रहे कि मुद्दा टूटे न...
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    Tauismसमाज में कब सुरक्षित महसूस करेंगी महिलाएं… सुनिए तीन ताल वाले ताऊ का ताऊइज़म.
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    Chakmak Chachaलोकतंत्र है भैया! सुनी सबकी जाती है… बाकी करना न करना तो पॉवर-पॉवर की बात है. कुछ समझे?
आज त्योहार के मौके पर कुदीप जी ने थोड़ा अंडर ड्रेस किया उसके लिए एक कहावत है - और दिन चंगे, त्योहार के दिन नंगे। कमलेश जी के कपड़ों का कलर कॉम्बिनेशन बड़ा लाइवली है - बिल्कुल जोधपुरी लड्डू। और आसिफ साहब के लिए ये ख़ास लाइन्स- सफ़ेद कुर्ते पर झिलमिलाते नुक़राई सितारे, तीन ताल के चाँद को देखकर, रश्क कर रहे हैं आसमान के चाँद-तारे।
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@Stuger16 · 3 hours ago
एपिसोड 181 में जब आप लोग 'टोपी का समाजशास्त्र और पहचान की राजनीति' पर बतरस कर रहे थे, तो टोपियों के कई वैश्विक और क्षेत्रीय आख्यान सुनने को मिले। उसी चर्चा से प्रेरित होकर मैं यह अपनी एक तस्वीर साझा कर रहा हूँ, जिसमें मैंने नेपाली संस्कृति की शान 'ढाका टोपी' धारण की हुई है। ढाका के विशेष धागों और ज्यामितीय पैटर्न (Geometric Patterns) से बुनी जाने वाली यह टोपी सिर्फ सिर का ढकाव नहीं, बल्कि गौरव, विशिष्ट पहचान और सम्मान का प्रतीक है। उम्मीद है तीन ताल की महफिल में नेपाल और पहाड़ों की इस सौगात को भी एक छोटा सा स्थान मिलेगा। जय हो, जय हो, जय हो! सुनील थापा दिल्ली एनसीआर से
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disapointing, मेरी चिट्ठी फिर नहीं ली। पता नहीं क्या, once again feeling the same “do I belong here?” लगरा है खुदी से बात कर रहा हूँ। किसी को पता है क्या, ऑडियो चिट्टी कैसे भेजनी है?
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तीन ताल के इस निज़ाम को आदाब अर्ज़ है। एक छोटी सी नज़्म लिखी है कुछ ग़लती हो तो माज़ेरत 🙏🏻 इक रोज़ मेरी फीड में आया था तू नज़र, जाने क्यूं हाथ रुक गए तुझ तीन ताल पर, कुछ देर तक तो था ये मेरी सोच से इतर, फेरी इधर नज़र तो कभी उस तरफ नज़र, दिन थे बड़े वो रंज के तू कू बकू सहर, हम जैसे तन्हा लोग को मिल जाए जैसे घर, जो सुन लूं तो लगे कि हाँ ये अपनी है ख़बर, हंसना कभी संगीन कभी इल्म बार दर, इन तीन तालियों का मैं चौथा सा रह गुज़र, खुश हूं कि मेरी फीड में आते रहे हो तुम, ताऊ को खान चा को सुनाते रहे हो तुम, इस सुर्ख़ ज़िंदगी को सजाते रहे हो तुम, अक्सर मेरे मिज़ाज में आते रहे हो तुम, फ़िलहाल को ये नज़्म यहीं पर रकम किया, कुलदीप भाई की ज़बान पर रहम किया, कुछ तमने इस गुमान को मेरे वहम किया। – सय्यद वली अब्बास जौनपुर से
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@mastmanna · 18 hours ago
धनतेरस पर silver coated इलायची लिया गया
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@7parth2002 · 19 hours ago
करवा करवारी ऊके बरहे दिन देवारी देवारी बैठी कोने आग लाग देठौने देठौने मारो गोली तब चार महीना होली
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Ayush Jaiswal
@Jaiswal · 21 hours ago
मैं लौटने के इरादे से जा रहा हूँ मगर सफ़र सफ़र है मिरा इंतिज़ार मत करना
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ताऊ, खांचा और सरदार को मेरा जय हो, जय हो, है हो! आज का दिन कुछ महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर आज के बाद के सात दिन मेरी अच्छी तबीयत से बीत गए, तो शायद मेरे भीतर एक नई ऊर्जा का संचार हो। मैं थक चुका हूँ, फिलहाल अपने रोज़मर्रा के कामों से भी और विचारों के इस निरंतर संचार से भी। किस्सा कुछ है नहीं, पर कहने को वेद-पुराणों से भी ज़्यादा है मेरे पास। भरा बैठा व्यक्ति कैसा होता है, यह आज समझ पा रहा हूँ। या यूँ कहूँ कि ख़ुद अपने भीतर विचारों का इतना बोझ लेकर बैठा हूँ कि अब उस एहसास को महसूस कर पा रहा हूँ। शायद माँ-पिता के साथ अगले कुछ दिनों का समय मुझे आने वाले कुछ महीनों को काटने, या यूँ कहें कि जीने की ऊर्जा दे जाए। एक अधेड़ में फँसा हूँ। समझ नहीं आता कि यह नौकरी छोड़ दूँ या कुछ नया करने का समय अब निकल चुका है। व्यक्ति पूरी ज़िंदगी भागता रहता है, मगर भाग नहीं पाता वहाँ से, जहाँ से वह वास …read more
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