10/10/2024
कल सोने से पहले पड़ा कि RNT की तबियत critical है..
अफवाह समझकर सो गया, सुबह पता चला के RNT नहीं रहे..
अजीब सी चुंबन हुई, ऐसा लगा के कोई अपना नहीं रहा..
कभी मिला नहीं, ना कभी उनसे रुबरु हुआ.. सिर्फ किस्से सुने..
असमान ने पूरा दिन अपना दर्द दबाया रखा..
रात होते होते सब्र का बाण टूट गया.. और वो फुट फुट के रोया..
मानो जैसे बदल का नकाब औड अपने दर्द को बतलाया..
बिजली की आवाज में चिलाया..
बारिश का पानी नहीं, अपने आंसुओं से शहर को नहलाया..
ए खुदा क्या खूब था तेरा बंदा, जिसका नाम भी तुमने खूब रखा..
वो मशरूफ रहा और कोशिश करी दुनिया को बेहतर बनाने में, इतना के उसने अपने नाम का कोई वारिस ही नहीं रखा..
असमान का गम कम हुआ, सुबह हुई और वो normal हुआ..