विवाह वर्षगाँठ के रहस्य
पहला वर्ष — कागज़
पहला वर्ष कागज़ जैसा,
सपनों से भर जाता है।
कभी प्रेम-पत्र लिखे जाते,
कभी समझौता याद आता है।
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पाँचवाँ वर्ष — लकड़ी
पाँच बरस में पेड़ बने हम,
जड़ें एक हो जाती हैं।
एक गिरे तो दूसरा डोले,
शाखें साथ निभाती हैं।
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दसवाँ वर्ष — टिन
दस बरस तक साथ रहे तो,
ठन-ठन थोड़ी होती है।
बाहर वाले कहते झगड़ा,
घर में वही तो संगीत है।
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पंद्रहवाँ वर्ष — क्रिस्टल
क्रिस्टल जैसे साफ़ हुए हम,
सच सब खुलकर दिखता है।
अब बदलेंगे? छोड़ो यार…
जो है, जैसा है, अच्छा है।
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बीसवाँ वर्ष — चाइना
बच्चे अब समझदार हुए,
देने लगे सलाह।
“मम्मी, पापा… सच बताना,
कैसे निभी ये राह?”
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पच्चीसवाँ वर्ष — चाँदी
चाँदी रोज़ चमकती कब है?
रगड़ो तब दमकती है।
वैसे ही रिश्तों की चमक,
रोज़ संभालने से रहती है।
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