जय हो जय हो जय हो।
सभी मानिंदो और तीन तालियों को होली की शुभकामनाएं।
परसाई जी का ये व्यंग मैने बहुत दिनों पहले पढ़ा था और पढ़ कर आश्चर्यचकित रह गया था कि कितनी सरलता से और कितने बेहतरीन तरीके से ये व्यंग लिखा गया है।
आज परिवार में एक निंदा गोष्ठी में भाग लिया तो ये व्यंग याद आ गया इसलिए आप सभी से साझा कर रहा हूं। जिन्होंने ने भी ये नहीं पढ़ा है वे इसे पढ़े और "निंदा रस परमसुख" में मिलने वाले आनंद की अनुभूति करे।