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Sanjay Kumar Singh

@Sanjay - Door-Darshi

Arrah, Bihar, India

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आज जब तीन ताल में आवाज़ पर बात हो रही है, तो मुझे भी अपने पुराने संस्थान का एक किस्सा याद आ गया। बात उन दिनों की है, जब हमारे बॉस एरिया सेल्स की पोज़िशन पर कार्यरत थे। वे पूरे दिन गुटखा सेवन किया करते थे। जैसा कि ताऊ ने कहा है कुछ लोग आग लगने पर भी अपने 30 rupiya बर्बाद नहीं करते! 😄 हमारे बॉस भी बड़े किफायती स्वभाव के थे। जब हम लोग वीकली मीटिंग में होते थे, तो वे मुँह खोलने की बजाय इशारों में ही जवाब दिया करते थे। आखिर मुँह में ₹30 का बेशकीमती पान-पराग जो दबाए हुए होते थे! 😄 वे अक्सर “हूँ… हाँ… और हूँ… हूँ…” करके ही काम चला लेते थे। और अगर कभी मुँह खोलने की बहुत ज़रूरत पड़ जाए, तो बस एक शब्द—“Okay!” 😂 बस, इसी “Okay” में पूरी मीटिंग का सार, निष्कर्ष और एक्शन प्लान निकल आता था। Aapka apna teen taliye  Sanjay door darshi  Delhi 
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तीन ताल के तीनों स्तंभों को, तीन तालिए संजय दूरदर्शी का नमस्कार। मेरा सवाल “ताऊ” से है  देश में पिछले कुछ महीनों से अलग-अलग मुद्दों को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं, और लोकतंत्र में जनता को अपनी आवाज़ उठानी भी चाहिए। लेकिन मेरा सवाल यह है कि उन मुद्दों पर बात कब होगी, जहाँ आम आदमी की जेब से बिना उसकी इच्छा के, नीतियों और नियमों के नाम पर पैसे सरकारी खाते में चले जाते हैं? मुझे सबसे बड़ा “खेल” तब दिखाई देता है, जब ट्रेन की टिकट कैंसिल कराने पर ₹300 तक काट लिए जाते हैं। अब इसमें सबसे मजेदार बात यह है कि यात्री ने कोई अपराध नहीं किया बस उसने अपना यात्रा का प्लान बदल दिया! 1.सवाल यह नहीं है कि कैंसिलेशन चार्ज क्यों है। 2.सवाल यह है कि चार्ज तय करने का आधार क्या है? 3.अगर सीट किसी और यात्री को दोबारा बेच दी जाती है, तो फिर पहले यात्री से इतनी बड़ी कटौती क्यों?
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वैसे जब खिचड़ी की बात चल ही रही है, तो एक बात साझा करना चाहूँगा। हमारे घर में हर शनिवार खिचड़ी बनती है। मेरी माताजी हमेशा प्यार से कहा करती थीं कि खिचड़ी के चार यार होते हैं—आलू का चोखा, पापड़, घी और अचार। — संजय दूरदर्शी, दिल्ली
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ताऊ खान चा और सरदार को संजय दूरदर्शी का नमस्कार। इस week का topic Malicious Compliance बड़ा ही अंदर तक लगने वाला है। हमारी ज़िंदगी में रोज़ कोई न कोई इस compliance के जरिए हमें हल्का-फुल्का बेवकूफ बनाकर निकल जाता है, और हम सोचकर चुप रह जाते हैं— “छोड़ो यार, इसका nature ही ऐसा है।” लेकिन असली खेल तो यही है— सामने वाला बड़े प्यार से “जी बिल्कुल” बोलकर आपकी हर बात मानेगा, पर ऐसे मानेगा कि बाद में आपको अपनी ही बात पर पछतावा हो जाए। मेरी इच्छा है कि आप उन नकली बॉसों पर भी चर्चा करें, जो खुद को कंपनी का मालिक नहीं बल्कि कंपनी का फूफा समझते हैं। ऐसे लोग designation से manager होते हैं, attitude से chairman, और behavior से ऐसे कि पूरी company इनके इशारों पर चल रही हो। तीन तालियाँ  संजय दूरदर्शी, दिल्ली।
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तीन ताल के तीनों स्तंभों को संजय दूरदर्शी का नमस्कार। आज का ये पैग़ाम ख़ास तौर पर ख़ान चा के नाम है।उन्होंने अपने किसी पॉडकास्ट में “गुस्ताख़ इश्क़” देखने की सलाह दी थी।ख़ान चा, वाक़ई क्या ग़ज़ब की फ़िल्म है!उसमें इस्तेमाल हुए उर्दू के अल्फ़ाज़ सीधे दिल में उतर जाते हैं। मेरी ख़्वाहिश है कि इस फ़िल्म के कुछ लफ़्ज़ अगर ख़ान चा पढ़ लें,तो महफ़िल में चार चाँद लग जाएँ। मोहब्बत की ज़बान का क्या कहना... अगर अंग्रेज़ी में अपने महबूब से कहो —“You look like a murderer,”तो शायद गाली सुननी पड़े। हिंदी में कहो —“हत्यारिन लग रही हो,”तो जूतों से नवाज़े जाओगे। मगर उर्दू में अगर इतना कह दो —“आप तो क़यामत की क़ातिल लग रही हैं…”तो यक़ीन मानिए,वो मुस्कुरा कर दिल ही लूट ले जाएँगी।और अगर ना ले जाएँ…तो मेरा नाम बदल दीजिए। Aapka teen taliya  Sanjay door darshi delhi 
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ताऊ को संजय दूर-दर्शी का प्रणाम 🙏🙏 वैसे तो मैं गौरवपूर्ण बिहार की धरती से हूँ, लेकिन पढ़ाई-लिखाई के बाद दिल्ली की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में कहीं खो-सा गया हूँ।  ताऊ, मैं भी उसी पीढ़ी से हूँ जो मॉडर्न, किस्मी बार, पॉपिन्स और खान चाचा की लसलसवा टॉफियों को ही *KHAKAR bada hue hain* हम तो मौसम के हिसाब से अपना स्वाद बदल लेते थे। गर्मियों में “मलाई बर्फ” का इंतज़ार पूरे साल rahta tha. अब बात टॉफियों की चल ही रही है तो ताऊ, आप एक बार “कॉफी फ्लेवर वाली KOPIKO” ज़रूर चखिए। सस्ती भी है, टिकाऊ भी है, और coffee ka स्वाद ..!!! निवेदन है कि अगले एपिसोड में इसका रिव्यू भी ज़रूर दीजिए। आपका तीन तालिया संजय दूर-दर्शी, दिल्ली
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तीन ताल के तीनों स्तंभों को संजय दूर-दर्शी का सादर नमस्कार 🙏 “कार्ड एक, कांड अनेक” वाला एपिसोड सुनते-सुनते मेरे भीतर का 2001 वाला नवयुवक अचानक ATM की लाइन से बाहर निकल आया। उस दौर में डेबिट कार्ड होना वैसा ही था जैसे आजकल किसी के हाथ में तीन कैमरे वाला iPhone दिख जाए  चाहे खाते में 37.50 रुपये पड़े हों, लेकिन वॉलेट थोड़ा तिरछा निकालकर चलने में जो शाही एहसास आता था, उसका कोई मुकाबला नहीं था। मेरी कंपनी ने हम कर्मचारियों को Citibank का डेबिट कार्ड दिया था। एक दिन मैं अपने परम ज्ञानी मित्र के साथ ATM पहुँचा। बैलेंस चेक किया तो आँखें गोल… दिल बाग-बाग… क्योंकि खाते में अचानक 12,000 रुपये अतिरिक्त दिखाई दिए। मैंने दोस्त को बताया। उसने बिना सोचे-समझे आर्थिक सलाह दे डाल
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Teen Taal ke tino stambho ko Delhi se Sanjay Door-Darshi ka pranam! Es week ka podcast topics agar NAKLI BOSS ho to maza aa jaye..😀😜😃 Tau, aajkal office me ek nayi prajati bahut tezi se badh rahi hai — “Nakli Boss”। Ye wo mahanubhav hote hain jo company me aise ghoomte hain jaise unke laptop ke charger se hi poori economy chal rahi ho। 😄 Inka confidence dekhkar lagta hai ki agar ye ek din leave par chale gaye, to share market me lower circuit lag jayega। Meeting me itna English bolte hain ki kaam kam aur “alignment”, “synergy” aur “visibility” zyada nikalta hai। Aur sabse khas baat — Ye har kaam ke baad bolte hain, “Guys, company ko abhi meri bahut zarurat hai…” Jabki asli sach ye hota hai ki company chupchaap unka replacement interview bhi le rahi hoti hai। 😜
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Tau, khan cha aur sardar ko sanjay door darshi ka namskar...es week ka episode dekha tab mujhe Bharosa ho gaya ki Bihar, UP ka admi har awstha me Bakiti kar sakta hai...Awadh sir aap bakaiti ke sirf star nahi, pure ‘Super Star Plus Ultra Pro Max’ ho! 😜 Aapko sunne ke baad to pakka yakeen ho gaya hai ki agar bakaiti Olympic game hota, to aap har baar gold medal lekar hi lautte. Jahanpanah, tussi great ho… aur aapki baatein usse bhi greater! 😄😜😃Jai Ho jai ho jai ho..... sanjay Door-Darshi delhi 
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तीन ताल के तीनों स्तंभों को संजय दूर-दर्शी का नमस्कार। मेरी ताऊ से ये जानना है कि Gen X, Gen Z और Gen Alpha वाले लोग आपस में अपना तालमेल कैसे बैठाएँ? Generation X वाले कहते हैं — “हमारे ज़माने में मोबाइल नहीं था, फिर भी दोस्ती और प्यार दोनों सच्चे थे।” Generation Z वाले कहते हैं — “WiFi चला दो, वरना हमारी आत्मा शरीर छोड़ देगी।” और Generation Alpha वाले तो पैदा होते ही ऐसे लगते हैं जैसे डॉक्टर से पूछ रहे हों — “Password क्या है WiFi का?” 😄
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