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Syed Vali Abbas

@castial_18

Jaunpur, Uttar Pradesh, India

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तीन ताल के इस निज़ाम को आदाब अर्ज़ है। एक छोटी सी नज़्म लिखी है कुछ ग़लती हो तो माज़ेरत 🙏🏻 इक रोज़ मेरी फीड में आया था तू नज़र, जाने क्यूं हाथ रुक गए तुझ तीन ताल पर, कुछ देर तक तो था ये मेरी सोच से इतर, फेरी इधर नज़र तो कभी उस तरफ नज़र, दिन थे बड़े वो रंज के तू कू बकू सहर, हम जैसे तन्हा लोग को मिल जाए जैसे घर, जो सुन लूं तो लगे कि हाँ ये अपनी है ख़बर, हंसना कभी संगीन कभी इल्म बार दर, इन तीन तालियों का मैं चौथा सा रह गुज़र, खुश हूं कि मेरी फीड में आते रहे हो तुम, ताऊ को खान चा को सुनाते रहे हो तुम, इस सुर्ख़ ज़िंदगी को सजाते रहे हो तुम, अक्सर मेरे मिज़ाज में आते रहे हो तुम, फ़िलहाल को ये नज़्म यहीं पर रकम किया, कुलदीप भाई की ज़बान पर रहम किया, कुछ तमने इस गुमान को मेरे वहम किया। – सय्यद वली अब्बास जौनपुर से
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तीन ताल के तमामी हज़रात को आदाब अर्ज़ है। आपका शुक्रिया कि बंकर कमेटी की चिट्ठी को अपने शो में जगह दी। एक किस्सा बंकर का जहां भाई जॉन बंकर के सदस्य मेरे दिल अज़ीज़ अक्सर मुझसे मिलने आ जाते हैं, मगर कभी मग़रिब के पहले नहीं आए। एक दिन ताज़ा दिल जली अवस्था में मैने उनके प्रेम प्रसंग पर कुछ टिप्पणी कर दी, तिलमिला कर खड़े हो गए और बोले तुम्हारे यहां आ गया हूं, अपने घर होता तो रिक्शा कर के कही चला जाता। मैने बोला जॉन भाई मैं रिक्शा मंगवा दूं, बोले अब भाई कह दिया है तो रिक्शे पर मट्टी डालो। दोस्तों में खास बात यही है कि बरसात की आग की तरह फट से जल कर बुझ जाते हैं। मेरे मकान मालिक मास्टर सल्लमहु जो हमारे कमरे में किराएदार भी हैं, ज़िंदगी की तपिश से लबरेज़, आंखों में मोटा चश्मा, मोटे से याद आया एक लंबू भी हैं जो पिछले 3 साल से मोटे होना चाह रहे, 6फीट लंबे और 51 किलो वज़न, शरीर एकदम स्वस्थ है पर वजन …read more
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ताऊ, खान चा, अतुल भाई और कुलदीप सरदार को बंकर कमेटी की तरफ से सादर प्रणाम। पिछली चिट्ठी में सरदार ने गुज़ारिश की थी कि बंकर कमेटी के बारे में बताइए। चंद शब्दों में बोल दे तो बंकर कमेटी जौनपुर के कुछ लौंडो की शरारत है, एक कमरा है जिसका मालिक ही किराएदार है, एक हिंदी फिल्म के रामू काका टाइप दोस्त भी है, चंद अफ़रात और भी हैं, ज़मीन पर बिछी कालीन, दीवार पर कुछ तस्वीरें, जौनपुर के इज़्ज़त मुआब लोगों के बच्चे-पोते अकसर शामें बसर करते हैं। शोर गुल, बे सर पैर की बातें, कभी काफ़ी सीरियस होके बे सर पैर की बातें। मगर हासिले ज़िंदगी यही है कि शाम अपने पसंदीदा लोगों संग बीते। अमूमन एक दो दोस्त बंकर पर रोज़ उपस्थित हो जाते हैं, यदि कमेटी ने कोई भोजन व्यवस्था का ऐलान कर दिया जो कि शनिवार शाम हो ही जाता है तो ज़्यादातर लोग आ जाते हैं, ये बैठकी शायद हमसब के लिए एक थेरेपी या तीन ताल का एक स्वरूप ही है। बंकर कम …read more
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तमामी हज़रात को आदाब अर्ज़ है। बात तो मुझे किसी और मौज़ू पर करनी थी पर sponsor Pulse का एक दिलचस्प किस्सा याद आ गया। बात है उन दिनों की जब मैं कक्षा 8 का छात्र था सन 2016। उड़ते-उड़ते खबर आई की हल्की उमर के लौंडों की रंगीन पसंद PassPass मार्केट के बादशाह ने एक टॉफी उतारी है। मगर दिक्कत ये थी कि वो आते ही मार्केट से शॉर्ट हो जाती, डीलरों तक के चक्कर काटे मगर मिल न सकी। आखिरकार भारत में अधिकतर कामों को करवाने में काम आने वाली चीज़ घूस का सहारा लिया गया। मोहल्ले के टपरी वाले को 30 रुपया इकट्ठा कर के खिलाया गया और उससे पहली खेप को हमे पहुंचने की बात डन हुई। विश्वास मानिए जनाब जब ये खेप हमें मिली और पहली बार मुँह में गई एक हल्की खटास और मसाले की भीनी सी मात्रा ने ज़िंदगी में एक नया माहौल बनाया। अब हमलोग उसे Pulse सुप्रीमेसी भी कहते हैं। फिलहाल इतना ही। ढेर सारा प्रेम मेरे और बंकर कमेटी की तरफ
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तमामी तीन ताल निज़ामकरदा को आदाब। खुजली की बात निकल गई है तो बताता चलूं कि मेरे एक घनिष्ठ दोस्त जॉन भाई को हाइजीनिक खाना खाने की खुजली रहती है। हालांकि उनके हर मनपसंदीदा खाने की जगह किसी बेहद अनहाइजेनिक मुकाम पे ही होती है। उनकी इन्हीं खुजलियों में एक खुजली ये है कि हर बड़े से बड़े और छोटे से छोटे भोजनालय में वो एक बाल्टी दाल जरूर मांगते है भले वहां टेबल पर बटर चिकन, टिक्का और कवाब जैसे बेहतरीन व्यंजन मौजूद हो। मगर खुजली के मारे जॉन भाई दाल बगैर रह नहीं पाते। दोस्त समाज उनसे तंग सा है और इस खुजली का संक्रमण ये है कि अब ऑर्डर देते वक्त ही दाल खुद ब खुद बोल दी जाती है। वैसे कुलदीप भाई का एकदम रॉ "ईही अबहीं के नसिया पाया भैय्या" was so true and genuine...  बाकी सभी को ढेर सारा प्यार। – वली जौनपुर से।
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आप तमाम लोगों को आदाब अर्ज़ है, वैसे तो जौनपुर कई चीजों के लिए मशहूर है मगर जौनपुर की एक स्पेशल डिश है लौंग लता, मुझे लगता है वो काफी अंडररेटेड रह गई है। बेनीराम की इमरती अपनी जगह सही है पर लौंग लता रबड़ी के साथ एक अलग नेमत है। वैसे बताता चलूं कि हमारे बकैती ग्रुप का नाम बंकर कमेटी है, उसमें एक से एक बोकराद (ए के ए) बकैत हैं, देश-दुनिया के सभी मसलों का हल किया जाता है। आगे और तफसीर से बात होगी। ढेर सारा प्यार।
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तमाम हज़रात को आदाब, तीन ताल का तहे दिल से शुक्रिया हर चीज़ के लिए। वैसे ये ज़रूर बता दूं कि आज का एपिसोड अब तक के सबसे ज़्यादा हंसाने वाले एपिसोड की फेहरिस्त में दर्ज हो गया है, पहली बार ताऊ का इतना शांत होके कम बोलना और ज़्यादा सुनना और खान चा को मानो बिछड़ा यार मिल जाए और ट्यूनिंग एकदम सेट वैसा सा माहौल रहा, कुलदीप सरदार अपने वन लाइनर्स और फनी एक्सेंट के साथ सबकुछ और बढ़िया कर देते हैं। तीन ताल की जमघट की तरह हमारा एक रूम है जिसका नाम बंकर है रोज़ शाम वहां भी बकैती ही होती है। बंकर के बारे में आगे बताता रहूंगा।  ढेर सारा प्यार ❤ जौनपुर से वली ।
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KAMLESH SINGH Liked
तमामी हज़रात को आदाब अर्ज है, वैसे तो चिट्ठियां लिखने का आदी नहीं हूं मगर तीन ताल से कुछ ऐसा लगाव है कि लब बिना कुछ कहे रह नहीं पाते। जैसे दुनिया का सबसे संगीन इंसान भी अपने मनपसंद लोगों की महफ़िल में अफलातून बने फिरता है कुछ वैसा सा हाल है। शाम में जब अपने काम से फ़ारिग होकर रूम पर आता हूं तो स्पीकर पे तीन ताल को ambient साउंड की तरह शुरू कर देता हूं, ताऊ, खान चा और कुलदीप सरदार अपने अंदाज़े गुफ्तगू से एक अलग तासीर और रौनक सी रहती है। ताऊ की तरह मैं भी बिना किसी आवाज़ के सो नहीं पाता तो तीन ताल से ताल मिला कर मौत की बहन को बुलाता हूं, शायद तीन ताल के निज़ामकरदा को खुद नहीं पता तीन ताल लोगों की ज़िंदगी को किस किस तरीके से खुशनुमा बना रहा है। फ़िलहाल यहीं इख़्तिताम है आगे और लिखने की कोशिश करूंगा। आपलोग ऐसे ही Summercool की तरह कूल बने रहें। - वली, जौनपुर से.
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Kuldeep Sardar Liked
Namaste Aaadab, Cooler pe aaj ki charcha ek ittefak hi hai, kal shaam mere azeez dost Owaisi meri gair maujoodgi me ghar aur duniyavi masroofiyat se faarig hokar aur hone ke liye room pr aaram krne gaye, cooler chalaya meri roz ki raftar se use aur tez chalane ke liye switch ghumaya aur ek tez blast ke saath kaafi dhua uthte dekha... dhua to khair honey comb se nikli dhool ka tha aur aawaz pankhe ki swing pad se takrane ki... waise mera cooler bhi Sumercool ka hi hai.. cooler ka varchasv poore dost samaaj me hai pichle do saal se garmi me mera saathi hai...kaan me nipora(earphone) laga ke apni Pharmacy ka kaam nipta leta hu din yunhi guzar jaate hain. Aage aur likhne ki koshish karunga filhal yehi ikhtetaam hai, dher saara pyaar, Jaunpur, UP se...- Vali.
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Cooler pe aaj ki charcha ek ittefak hi hai, kal shaam mere azeez dost Owaisi meri gair maujoodgi me room pr aae, cooler chalaya meri riz ki raftar se use tez chalane ke liye switch badhaya aur ek tez blast ke saath kaafi dhua ho gaya... dhua to khair honey comb me dhool ka tha... waise mera cooler bhi Sumercool ka hi hai.. cooler ka varchasv poore dost samaaj me hai... dher saara pyaar, Jaunpur UP se...- Vali
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