बाकी सब बातें स्वीकार हैं, मगर क्रिकेट बैन?
ये एक्सेप्टेबल नहीं है…
जनाब, क्रिकेट प्रोफेशन और खेल की बहस से कहीं आगे निकल चुका है।
क्रिकेट हमारा धर्म है, क्रिकेट हमारी ज़ात है।
क्रिकेट ही इश्क है, क्रिकेट ही जज़्बात है।
हमने सुना, क्रिकेट को जुआ कहा गया।
अजी, तो क्या ये संसार जुआ नहीं है?
क्या ये रिश्ते जुआ नहीं हैं?
क्या ये सांसें जुआ नहीं हैं…
किन-किन चीज़ों पर बैन लगाएंगे आप?
क्रिकेट धड़कन है हमारी, इस धड़कन पर बैन लगाएंगे आप?