ताऊ , खान चा , सरदार को सादर जय हो , जय हो , जय हो तीन ताल सुनने के बाद मन में एक तीव्र इच्छा हुई , कि एक पत्र लिखा जाए , बहुत सोचा मगर अभी समझ नहीं आता किया लिखूं , तो सोचा कि अपनी लिखी एक ग़ज़ल भेज रहा हु अगर सरदार इसको अपनी आवाज में पढेंगे और एपिसोड में शामिल करेंगे तो बहुत अच्छा लगेगा और प्रोत्साहन भी मिलेगा ,
जय हो , जय हो , जय हो