आदरणीय तीन ताल के त्रिदेव को मेरा सादर ,
जय हो - जय हो - जय हो ,
एक ग़ज़ल कहने की फिर कोशिश मैंने करी है, इसकी प्रेरणा पॉपुलर मेरठी साहब के एक कतात से ली गई है , उम्मीद है , आप सबको पसंद आएगी :-
दुद्धी के इन चचा को मानिंद क्लब की सदस्यता तुरंत ही ससम्मान प्रदान की जानी चाहिए
ये रोज शाम "दम-युक्त" होकर 112 पर कॉल करते हैं और पुलिस को कहते हैं कि मुझे घर छोड़ आओ