Part-5-:घर की छत पर बैठकर जब पूरे गाँव को देखता हूँ, तो विकास के नाम पर बस बिजली के खंभे दिखाई देते हैं, जिनसे लगभग 18 घंटे बिजली तो आती है, लेकिन वोल्टेज का कोई भरोसा नहीं होता , हा विकास के नाम सड़के जरूर बनी है लेकिन सड़को के पास लगे बिजली के खम्भों पर street light ka अभाव है, कुछ जगह तो मेन रोड जो राज्यों को जोड़ते है , ट्रक आते जाते है वहाँ भी street light नहीं है....
एक और चीज़ जो नज़र आती है वो है लगभग हर संपन्न या थोड़ा-बहुत सक्षम घर की छत पर सोलर पैनल.....लेकिन मैं इसे विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि मजबूरी का प्रतीक मानता हूँ.... अगर बिजली की व्यवस्था अच्छी होती, तो शायद इतनी बड़ी संख्या में सोलर पैनल लगाने की ज़रूरत ही न पड़ती.... दिलचस्प बात यह है कि शहरों में आज भी सोलर पैनल उतनी संख्या में नहीं दिखते, जितने गाँवों में..... Contd.