Part-10-:और वह लूडो वाली बच्ची, वह माँ-बेटी… शायद वे इतने पीछे छूट गई हैं कि अब उनका हाथ पकड़ना भी मुश्किल हो गया है..... शायद अब कुछ बदल सके तो वह उनकी अगली पीढ़ी के लिए होगा........
बाकी बातें अपनी जगह हैं......
मुझे, या किसी और को, सरकारों को दोष देने का नैतिक अधिकार भी तब तक नहीं है, जब तक हमने स्वयं वोट देते समय इन मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दी....
जो बोया है, वही काट रहे हैं....
रात के 1:37am बजे जो कुछ याद आया, लिख दिया, बहुत-सी घटनाएँ अभी भी छूट गई हैं।।।।
अब फैज याद आ रहे,
और भी ग़म हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा,
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा...
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