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ढोंगी दार्शनिक

@abhishek_dltg

Pune, Maharashtra, India

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किसी को याद है क्या ? रोशी महंता की बिल्लियां.. पता हो तो खबर करें । अब इसकी जानकारी गूगल और AI के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं है इसलिए सिर्फ खांटी सिनेमची ही इस प्रश्न को सुलझा सकते है । वैसे सुना था AI आपको धोखे में रखता है वो झूठ इतने कॉन्फिडेंस से बोलता है कि आपको अपने  आप की जानकारी पर शक हो जाए , आज परख भी लिया , उसने कुछ और बताना चाहा लेकिन हम भी कहां उसकी मानने वाले। हर तरीके से पूछा कि रोशी महंता कौन था उसके कुछ नहीं मालूम फिर उसकी बिल्लियों के बारे में क्या ही मालूम होगा। खैर, जितने बिल्लियों से पाला पड़ा है इतना तो मालूम है जो सरदार ने बताया बिल्ली बहुत ही बेशर्म और स्वार्थी प्राणी होती है। ।। जय हो ।।
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ये जो फोटो है, इनका नाम है रॉकेट। मुलाकात हुई और हमने भी निर्णय लिए “हम भी बिल्ली पालेंगे!” कारण सीधा था, कुत्ते हमारे दियासलाई जैसे फ्लैट में फिट नहीं बैठते। हमारे अनुभवी मित्र ने तुरंत ब्रेक लगाया बोले, “पहले किसी बेघर जानवर को रोज खाना खिलाओ, गायब हो जाए तो ढूंढो, बीमार हो तो इलाज करवाओ… ये सब 4 महीने कर लो, फिर 15 दिन के लिए ‘रॉकेट’ को रख लेना।” मतलब सीधे इंटरव्यू नहीं, पहले इंटर्नशिप! उधर सरदार ने भी जो बताया था सब मैच कर रहा था, खाना अलग, फ्लेवर अलग । हमने 2 दिन वहीं रहकर रॉकेट का रूटीन देखा—जनाब का टाइमटेबल हमसे ज्यादा टाइट।  एटिट्यूड इनके उन्नत ब्रीड से आते हैं । ये जब आया था तो ३५ हजार का था २ महीने का । तीसरे दिन ही हमने हाथ जोड़ लिए“भाई, हमसे ना हो पाएगा।” जो थोड़ी बहुत खुशी बची है, वही संभाल कर रख लेते हैं… और आते जाते दूर से सलाम ठोक लेंगे । 
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ये जो फोटो है, इनका नाम है रॉकेट। मुलाकात हुई और हमने भी निर्णय लिए “हम भी बिल्ली पालेंगे!” कारण सीधा था, कुत्ते हमारे दियासलाई जैसे फ्लैट में फिट नहीं बैठते। हमारे अनुभवी मित्र ने तुरंत ब्रेक लगाया बोले, “पहले किसी बेघर जानवर को रोज खाना खिलाओ, गायब हो जाए तो ढूंढो, बीमार हो तो इलाज करवाओ… ये सब 4 महीने कर लो, फिर 15 दिन के लिए ‘रॉकेट’ को रख लेना।” मतलब सीधे इंटरव्यू नहीं, पहले इंटर्नशिप! उधर सरदार ने भी जो बताया था सब मैच कर रहा था, खाना अलग, फ्लेवर अलग । हमने 2 दिन वहीं रहकर रॉकेट का रूटीन देखा—जनाब का टाइमटेबल हमसे ज्यादा टाइट।  एटिट्यूड इनके उन्नत ब्रीड से आते हैं । ये जब आया था तो ३५ हजार का था २ महीने का । तीसरे दिन ही हमने हाथ जोड़ लिए“भाई, हमसे ना हो पाएगा।” जो थोड़ी बहुत खुशी बची है, वही संभाल कर रख लेते हैं… और आते जाते दूर से सलाम ठोक लेंगे । 
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ये जो फोटो है, इनका नाम है रॉकेट। मुलाकात हुई और हमने भी निर्णय लिए “हम भी बिल्ली पालेंगे!” कारण सीधा था, कुत्ते हमारे दियासलाई जैसे फ्लैट में फिट नहीं बैठते। हमारे अनुभवी मित्र ने तुरंत ब्रेक लगाया बोले, “पहले किसी बेघर जानवर को रोज खाना खिलाओ, गायब हो जाए तो ढूंढो, बीमार हो तो इलाज करवाओ… ये सब 4 महीने कर लो, फिर 15 दिन के लिए ‘रॉकेट’ को रख लेना।” मतलब सीधे इंटरव्यू नहीं, पहले इंटर्नशिप! उधर सरदार ने भी जो बताया था सब मैच कर रहा था, खाना अलग, फ्लेवर अलग । हमने 2 दिन वहीं रहकर रॉकेट का रूटीन देखा—जनाब का टाइमटेबल हमसे ज्यादा टाइट।  एटिट्यूड इनके उन्नत ब्रीड से आते हैं । ये जब आया था तो ३५ हजार का था २ महीने का । तीसरे दिन ही हमने हाथ जोड़ लिए“भाई, हमसे ना हो पाएगा।” जो थोड़ी बहुत खुशी बची है, वही संभाल कर रख लेते हैं… और आते जाते दूर से सलाम ठोक लेंगे । 
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जानवरों और प्रकृति से प्रेम कोई नई बात नहीं—हम भी वहीं से निकलकर आज दियासलाई के डिब्बे जैसे फ्लैट में सिमट गए हैं। एक मित्र हैं, पक्षियों से इतना प्रेम कि वो भी उन्हें “भाई” कहकर उड़ते हैं। लेकिन उनका दूसरा रूप तब दिखा जब एक दिन चाय-सुट्टे का बुलावा आया। पहुंचे तो देखा भीड़, डंडे और बीच में अंडरग्राउंड टैंक—जिसमें सांप गिरा था! लोग मारने को तैयार, और हमारे मित्र उसे बचाने में लगे। बड़ी मशक्कत से सांप को जार में बंद किया और शहर की परिधि से दूर छोड़ने गए पूरे रस्ते बाजू की सीट पर अपनी गोद में जार को रहे रहें, आने जाने के क्रम में पता चला सांप भी स्वार्थी जानवर है और जनाब कॉलेज में सांप पालते थे और उनके साथ ही रहते थे! अब शादी क्यों नहीं हुई, ये भी समझ आ गया—भला कौन सांपों को सौतन बनाकर घर बसाए! इनका उपनाम भी “नागदेव” ही है। एक बार इंदौर के एक मानें TT स्टाफ को उनके सत्संग का सुअवसर मिला है।
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किसी को याद है क्या ? रोशी महंता की बिल्लियां.. पता हो तो खबर करें । अब इसकी जानकारी गूगल और AI के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं है इसलिए सिर्फ खांटी सिनेमची ही इस प्रश्न को सुलझा सकते है । वैसे सुना था AI आपको धोखे में रखता है वो झूठ इतने कॉन्फिडेंस से बोलता है कि आपको अपने  आप की जानकारी पर शक हो जाए , आज परख भी लिया , उसने कुछ और बताना चाहा लेकिन हम भी कहां उसकी मानने वाले। हर तरीके से पूछा कि रोशी महंता कौन था उसके कुछ नहीं मालूम फिर उसकी बिल्लियों के बारे में क्या ही मालूम होगा। खैर, जितने बिल्लियों से पाला पड़ा है इतना तो मालूम है जो सरदार ने बताया बिल्ली बहुत ही बेशर्म और स्वार्थी प्राणी होती है। ।। जय हो ।।
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।।जय हो।। पंजाबी बाग के कुत्ते 😄 एक बार हमारे एक मित्र इंटरव्यू देकर लौट रहे थे—जेब खाली, मन भारी। तभी एक कुत्ते ने लपक लिया। दोनों ही भूखे थे—एक ने लात चलाई, दूसरे ने लात पकड़ ली! मैं मेरठ मे था और २००४ में मेरठ से दिल्ली का सफर आज की तरह आसान नहीं थे। अन अन्य मित्र के सहयोग से क्लीनिक पहुंचे। डॉक्टर ने पूछा—“कुत्ते को पहचानते हो?” जवाब ऐसा मिला कि सुनकर डॉक्टर भी कन्फ्यूज 😄 बोले मेरा मतलब था पालतू था या नहीं, पर भाईसाहब ने कोई रिस्क नहीं लिया—पूरा फ्री वाला इंजेक्शन कोर्स शुरू।  चौथे इंजेक्शन के बाद शरीर ने जवाब दे दिया और घर वापसी हो गई। आज भी उस “डॉगेश” को धन्यवाद देते हैं—इंटरव्यू का रिजल्ट भूल गया, पर कहानी अमर हो गई! और वही दोस्त आज हॉस्पिटल के निदेशक पद पर विराजमान हैं 😄
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गमछा और तौलिया -  गमछा देसी ऑलराउंडर—नहाओ या पसीना पोंछ लो, धूप से बचो, तकिया बनाओ, जरूरत पड़े तो स्टाइल भी मार लो। कंधे पर टंगा रहता है, हमेशा रेडी। तौलिया शहर का सभ्य मेहमान—काम एकदम पक्का: नहाने के बाद शरीर सुखाना। और भाई, तौलिए पर बैठने के लिए सलीका चाहिए, ऐसा-वैसा कोई भी तौलिए पर बैठता नहीं… महंगा शौक है! अक्सर किसी और के खर्चे पर ही चलता है 😄  सूखने में तौलिया टाइम लेता है, जैसे सरकारी फाइल चल रही हो, जबकि गमछा मिनटों में तैयार। भावनाओं में भी गमछा भारी—गांव, बचपन, अपनापन सब जुड़ा है। निष्कर्ष: तौलिया स्पेशलिस्ट है, पर गमछा मल्टीटास्किंग का बादशाह 😄
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हम तो बचपन से ही गमछा-समर्थक ही रहे हैं 😄 बहुउपयोगी और आप इसे कंधे पर ले कर चल सकते हैं .. ये आपको परेशान नहीं करता । तौलिया बेचारा आज भी “बाहरी राज्य का तंदरुस्त मेहमान” ही बना हुआ है —ना उससे कोई दुश्मनी है, ना खास यारी। बस इतना है कि उसे ड्रॉइंग रूम तक एंट्री मिलती है, बेडरूम की सदस्यता अभी भी वेटिंग लिस्ट में है! 😄
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खुबसूरत हैं आँखें तेरी, रात को जागना छोड़ दे, खुद-बखुद नींद आ जाएगी, तू मुझे सोचना छोड़ दे ।  #हसनकाजमी
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