नमस्कार और जय हो सरदार, ताऊ, खांचा एवं पूरी तीन ताल मंडली को। मैं तीन तालियों की बिरादरी में एकदम नया सदस्य हूँ। मेरा जन्म और पालन-पोषण सोनभद्र के शक्तिनगर में हुआ। पैतृक जड़ें बलिया से जुड़ी हैं और वर्तमान में परिवार लखनऊ में रहता है, इसलिए पूर्वांचल और अवध दोनों का असर है। तीन ताल से परिचय यूट्यूब की कुछ रील्स के माध्यम से हुआ। फिर स्मिता प्रकाश जी वाला एपिसोड सुना और उसके बाद धीरे-धीरे तीन ताल की आदत सी लग गई। आजकल नया एपिसोड आते ही कान अपने आप हाज़िरी लगाने पहुँच जाते हैं। तीन ताल सुनते हुए कॉलेज के दिनों की अड्डेबाज़ी और बकैती याद आ जाती है। कई बार लगता है कि कोई पॉडकास्ट नहीं, बल्कि पुराने दोस्तों की महफ़िल चल रही है जहाँ बात शुरू कहीं से होती है और पहुँच कहीं और जाती है। यह मेरी पहली पोस्ट है। यदि इसका जिक्र हो जाए तो मेरे जैसे नवोदित तीनतालिया की खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा।
जय हो!