ताऊ, कुलदीप और खान चा को जय हो, जय हो, जय हो
मेरे लिए इस हफ़्ते का सबसे बेहतरीन हिस्सा तीन ताल एपिसोड 138 का 45वें से 47वें मिनट के बीच था, जब आप सब घंटा, मिनट और घंटे पर चर्चा कर रहे थे। उस समय ताऊ ने अपनी चतुराई भरी बातों से सबको उलझा दिया और लाज़ावाब कर दिया—यह सचमुच मज़ेदार और आनंददायक था। ऐसे पल मुझे हर एपिसोड के साथ ताऊ का और भी बड़ा फैन बना देते हैं।
खान चा की मासूमियत उन्हें ताऊ का आसान शिकार बना देती है, जबकि कुलदीप चालाकी से बच निकलते है और मज़ा बढ़ा देते हैं।
ताऊ का व्यंग्य, खान चा की मासूमियत और कुलदीप सरदार का सयानापन मिलकर ऐसा तालमेल बनाते हैं जो श्रोताओं को बाँधे रखता है। एपिसोड 138 ने एक बार फिर साबित किया कि तीन ताल को फॉलो करना कितना सुखद है।
टेकनाथ
रहवासी - कानपुर(पैत्रक निवास)