bhaag 2
"बिजलीघर में कबूतर" हैडिंग से फ़ाइल बन चुकी थी, कई लाल चिट लग जाने के कारण फ़ाइल में भी जान आ गई थी।अब बिल की सेंक्शन हेतू पत्र हैड ऑफिस जाने शुरू हो गए थे,वहां भी यही ऑब्जेक्शन उठा,लगता था कबूतर भी लाल फीताशाही से रंग लेने पर तुला हुआ था पुराना सिलसिला बरकरार रहने व पत्राचार भी आरंभ होने से बिल एक हज़ार बहतर रुपये तक जा पहुंचा था।बिजलीघर में कबूतर के चर्चे आम हो गए थे।कर्मकाण्डी शर्मा जी कबूतर को मारना भी नहीं चाहते थे और इसी कारण ही यह इतना बड़ा कांड हो गया था।बेचारे कबूतर को भी क्या मालूम कि उसने कितना बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया है।अब कबूतर बिजलीघर की सम्पत्ति बन गया था,उसे जिंदा रखना भी जरूरी था,उसके भोजन पर भी खर्च होने लगा।