जय हो जय हो जय हो
ताऊ और खांचा को प्रणाम एवं सरदार को ssup !
मैं बैंगलोर में रहने वाला एक IT का वो मजदूर हूं जिसको दिहाड़ी भी नहीं मिलती क्योंकि तनख्वाह महीने के अंत में आती है ।मेरे बचपन का एक किस्सा है जो आप सबसे साझा करना चाहता हूं - बात शायद 1996-1997 की है जब मैं बुलंदशहर के नरोरा शहर में रहता था । मेरे चाचा एयरफोर्स में थे तो उनकी पोस्टिंग बाहर थी तो उनके लड़के और हमारे बड़े भैया मेरे और छोटे भाई के साथ में रहते थे। छोटा भाई अभी स्कूल नहीं जाता था तो जब तक हम लोग नहीं आते वो अकेले ही खेलता रहता था। एक दिन की बात है कि हमारे पड़ोस वाले अंकल के घर कोई मेहमान कार में आये। उस समय के लिए कार बहुत बड़ी चीज होती थी। उस दिन मैं और बड़े भाई स्कूल से वापस आए तब तक सब कुछ शांत था। थोड़ी देर बाद पता चला कि पड़ोस के अंकल ने पापा को बता दिया है कि मेरे छोटे भाई ने उनकी कार का शीशा तोड़ दिया था ।