आज तीन ताल में धान की बात हुई तो मुझे अपने बचपन में पिता जी द्वारा शिखाई एक लोकोक्ति याद आ गई । हथिया में हाथ-गोड़, चित्रा में फूल, चढ़त सेवाती (स्वाति) झम्पा झूल।
हा आप मेंबर ओनली वाला फ़ीचर ला रहे है वो ठीक है एक उचित मूल्य पर लाइये हम तीन तालीये दिल खोल के समर्थन देंगे।।