आज नाराज है ...
आज नाराज है फिर नींद मेरी आँखों से....
दूर है ख्वाबों की फिर ईद मेरी आँखों से....(१)
कल को सोचा था कि कल तो आएगी,
उस कल की आस लिए नींद, मेरी आँखों से...(२)
आज नाराज है ...
होश संभला ही था कि रोज की कशाकश ने,
सारा पानी लिया खरीद, मेरी आँखों से ...(३)
आज नाराज है....
रूह के चाक- गिरेबां से झांकती है शिकस्त,
अब नहीं जीत की उम्मीद, मेरी आँखों से ...(४)
आज नाराज है....
उम्र भर पाल भरम हम हुआ किये मोहसिन
हो रही आज है तरदीद, मेरी आँखों से.....(५)
आज नाराज है...
हम भी हो जाते खुद्दारों में शुमार,
टपकें मोती दो जो मजीद, मेरी आँखों से.....(६)
आज नाराज है...