ये कविता ताऊ के लिए
जब जी चाहे जितना चाहे मिलाओ पेट्रोल में एथेनॉल,
जब कोई पूछे ऊपरवाले से, ई का है भगवान?
नितिन जी बोले, गुड़ का गोबर है बबुआ बहुते महान,
अब तक सिर्फ इंसान खात रहे, कहूँ गाड़ी के ना कोई अभिमान।
तू हो साला एंटी-नेशनल, ना चाहिबो तू देश महान।