विद्रोह करो तुम आज
हाथ बढ़ा, कोई गिरते
रुपैया को उठाओ,
सिलेंडर संग राशन की
बढ़ती कीमत से हमको बचाओ।
बिगुल बजाओ तुम आज,
विद्रोह करो तुम आज।
शिक्षा के गिरते स्तर,
स्कूलों के बढ़ते दाम हैं,
अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था से
मरते हम ही आम इंसान हैं।
आवाज़ उठाओ तुम आज,
विद्रोह करो तुम आज।
सड़क बनने से पहले
जमीन खरीद रहे साहबों को जकड़ो,
चोरों को ही पकड़ना है तो
पहले पूरे थाने को पकड़ो।
कुछ तो करो तुम आज,
विद्रोह करो तुम आज।
दस गाड़ियों से चलते नेताजी के
काफिले को कोई रुकबाओ,
बड़ी-बड़ी ज़मीनें हड़पने का
आमंत्रण उन्हें देकर आओ।
इसको रोको तुम आज,
विद्रोह करो तुम आज।
उठा तिरंगा हाथ में,
सड़क पर निकलो तुम आज,
विद्रोह करो तुम आज।
~ सत्यम भास्कर