कभी-कभी हम स्वयं को विकसित सभ्यता का श्रेष्ठतम श्रेणी का मार्गदर्शक एवं आदर्श होने के प्रयास में ऐसे तर्क और विचार प्रस्तुत कर देते हैं जो एकदम मूढ़तापूर्ण है। इन दिनों ऐसा ही एक विचार सोशल मीडिया पर चर्चित है कि यदि अरेंज मैरिज को हटा दिया जाए तो अधिकतर लड़कों के लिए समस्या का सबब बन जायेगा। इनका मत है कि लड़कों को स्त्रियों से संवाद का ढंग नहीं आता और उनमें पुरुषत्व के अहंकार के अलावा कुछ भी विशेष नहीं।
ऐसे प्रगतिशील विद्वानों से मेरा कहना है कि लड़कों पास भी माताएं और बहनें हैं तो क्या उनसे कभी बात ही नहीं की,हो सकता है सभी के पास बहनें ना हो किन्तु बिन माता के तो लड़कों का अस्तित्व सिर्फ ऐसे प्रगतिशील लोगों के विज्ञान ही में संभव है।
मुख्य बात विवाह एक अप्राकृतिक प्रक्रिया है जिसे समाज द्वारा निर्मित किया गया है इसलिए अरेंज मैरिज है,शेष सभी स्तनधारियों में विवाह मौजूद नहीं है।