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छोटा चिमटा

@Sarpnch

Lalitpur, Uttar Pradesh, India

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तीन ताल में अब भुवन बाम को बुलाइए। उनके सफर, कॉमेडी और क्रिएटिविटी पर तीन ताल वाली बतकही खूब जमेगी! ❤️
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सब चंगा था, लेकिन मुझे लगा कि भारतीय डिटेक्टिव किरदारों की चर्चा में एक छोटी-सी कमी रह गई। चाचा चौधरी का ज़िक्र ज़रूर होना चाहिए था—भले ही वे पारंपरिक डिटेक्टिव न हों, लेकिन उनकी पहचान ही अपनी बुद्धि से मुश्किल से मुश्किल समस्या सुलझाने की थी। साथ ही दूरदर्शन पर आने वाले करण द डिटेक्टिव का भी उल्लेख किया जा सकता था। ये दोनों किरदार भारतीय दर्शकों की डिटेक्टिव और रहस्य वाली दुनिया की यादों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।
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ताऊ से एक सवाल:- जब परिचय की बात आती है तो हम ‘तथ्यों’ पर ध्यान देते हैं। सहजता से बता देते हैं कि, जन्म कहाँ हुआ। कब हुआ। माता-पिता कौन हैं; लेकिन क्या ये तथ्य ही हमारा परिचय है?
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क्या लेकर आए थे और क्या लेकर जाओगे? पढ़ लिया गीता में और भाषण देने लगे। मतलब भी समझते हो इसका?इसका सिंपल अर्थ है कि अपनी रिटर्न सही-सही और समय पे फाइल करो... तुमसे हिसाब माँगा जा रहा है कि बताओ क्या लेकर आए थे 31 मार्च तक और क्या ले के जाओगे 31 मार्च के बाद? कभी सोचा है कि 1 अप्रैल को ही मूर्ख दिवस क्यों कहा जाता है? क्योंकि आफ्टर फाइलिंग, अवर रिटर्न, डेट इज़ द वेरी फर्स्ट डे जब या तो हम इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को मूर्ख बनाते हैं या डिपार्टमेंट हमको मूर्ख बनाता है। वो ऑल प्ले गेम ऑफ फूल्स। हमारा वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल, यानी मूर्ख दिवस से शुरू होकर 31 मार्च, अर्थात धूर्त दिवस पर समाप्त होता है। पढ़-लिख गए, लेकिन इतना भी नहीं समझते कि मूर्खता से शुरू होने वाला जीवन धूर्तता पर ही समाप्त होता है। यह पंक्तियां हमाये बुंदेलखंड की शान आशुतोष राणा जी (दादा) की पुस्तक मौन मुस्कान की मार से ली गई है।
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इंसान की इच्छापूर्ति ही स्वर्ग है,और उसकी इच्छा पूरी न  होना नरक।। या फिर   स्वर्ग नरक परिस्थिति पर नहीं मनःस्थिति पर निर्भर करता है।।
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हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी जिस को भी देखना हो कई बार देखना
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"मनुष्य को केवल उसके कर्मों से मत पहचानिए, क्योंकि हर चेहरे के पीछे एक ऐसी कहानी छिपी होती है, जिसे दुनिया नहीं जानती। किसी का क्रोध उसके भीतर वर्षों से पल रहे अपमान की देन हो सकता है हम सब अपने-अपने बोझ ढो रहे हैं। इसलिए किसी को देखकर तुरंत निर्णय लेने के बजाय उसके संघर्ष को समझने का प्रयास कीजिए।"
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“ताऊ , वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने वाले हालिया बिल को आप कैसे देखते हैं—क्या राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान के समान कानूनी सम्मान मिलना चाहिए?”
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“ताऊ , वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने वाले हालिया बिल को आप कैसे देखते हैं—क्या राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान के समान कानूनी सम्मान मिलना चाहिए?”
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धार्मिक दंगो में मरने वाले लोगों की लाश न जलायी जानी चाहिए न ही दफ़नायी जानी चाहिए उन्हें तो रख देना चाहिए धार्मिक स्थलों के भीतर उन लाशों से उठती दुर्गन्ध के फलस्वरूप धार्मिक स्थलों की दीवारें जब चटकने लगेंगी शायद तब जाकर तुम्हें आभास होगा धर्म बचाने के लिए की गई हत्याओं से तुम्हारे ईश्वर का दम घुटता है।
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